मैं गीत गाऊँ, जीवन के सफर को, मैं खुद पे लुटाऊँ।

 ''बिती रात की यादों को,

मैं सुनाऊँ सबको। धड़कनों की गूँथ को, सपनों में बुनाऊँ।

खुद से जुदा होकर, मैं गाऊँ सच्चे दिल से। हर पल को मनाऊँ, मिलकर सबको मुस्कराऊँ।

धूप की किरनों सा, रंग भरूँ मैं जीवन को। खुशियों के गीत गाऊँ, दुखों को भूलकर मैं सजाऊँ।

जीवन के सफर में, मैं हर मोड़ पे रुक जाऊँ। गीत गाते जाऊँ, सपनों को हकीकत बनाऊँ।''

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