ऐसा लगा जैसे, सीधा कैलाश पर पहुंच गए हैं,
ऐसा लगा जैसे, सीधा कैलाश पर पहुंच गए हैं,
आत्मा की गहराईयों में खो गए हैं। हर धड़कन में छुपी एक राह है, यह जीवन का सफर, यह नई बात है।
ज्ञान की धारा, अनमोल अहसास है, कांपती धड़कन, अब सन्नाटा बन गई। क्या सच्चाई है, ये सवाल हर दिन, आत्मा के प्रश्नों का सबाब बन गए हैं।
सीधा कैलाश पर पहुंच कर खुद को पाएं, आत्मा के अनमोल रहस्यों को समझे। इस सफर का मकसद, ज्ञान की खोज में, हर कदम पर नया दर्शन, नई रोशनी का चेहरा दिखाए।''
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