तुम्हारी चाँदनी में खिलते हैं मेरे फूल
तुम्हारी चाँदनी में खिलते हैं मेरे फूल
तुम्हारी हवा में गाते हैं मेरे पंछी तुम्हारी बारिश में उगते हैं मेरे सपने तुम्हारी धूप में चमकते हैं मेरे दिन
दूसरा छंद
मैं पत्थर हूँ, तुम हो पारस मैं हूँ अधूरा, तुम हो पूर्ण मैं हूँ अंधेरा, तुम हो प्रकाश मैं हूँ दुखी, तुम हो सुख
तीसरा छंद
तुम्हें पाने के लिए मैं तरसता हूँ तुम्हें छूने के लिए मैं व्याकुल हूँ तुम्हें अपने बनाने के लिए मैं बेताब हूँ तुम्हें अपना बनाने के लिए मैं तैयार हूँ
चौथा छंद
लेकिन तुम मुझसे दूर क्यों भागती हो तुम मुझसे क्यों मुँह मोड़ती हो तुम मुझे क्यों ठुकराती हो तुम मुझे क्यों नहीं अपनाती हो
पांचवां छंद
क्या मैं तुम्हारे लिए काफी नहीं हूँ क्या मैं तुम्हारे योग्य नहीं हूँ क्या मैं तुम्हारे प्यार का हकदार नहीं हूँ क्या मैं तुम्हारे साथ रहने का हकदार नहीं हूँ
छठा छंद
तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ तुम्हारे बिना मैं अपूर्ण हूँ तुम्हारे बिना मैं अंधेरा हूँ तुम्हारे बिना मैं दुखी हूँ
सातवां छंद
तुम्हें पाने के लिए मैं कुछ भी करूँगा तुम्हें छूने के लिए मैं कुछ भी करूँगा तुम्हें अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी करूँगा तुम्हें अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी करूँगा
आठवां छंद
बस एक बार मुझे मौका दो बस एक बार मुझे प्यार करने का मौका दो बस एक बार मुझे अपना बनाने का मौका दो बस एक बार मुझे अपना बनाने का मौका दो
नौवां छंद
मैं तुम्हें वादा करता हूँ मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा मैं तुम्हें कभी नहीं दुखी करूँगा मैं तुम्हें हमेशा प्यार करूँगा
दसवां छंद
तुम ही मेरी दुनिया हो तुम ही मेरा जीवन हो तुम ही मेरा सब कुछ हो तुम ही मेरा प्यार हो
अंतिम छंद
तुम्हें पाने के लिए मैं तरसता हूँ तुम्हें छूने के लिए मैं व्याकुल हूँ तुम्हें अपने बनाने के लिए मैं बेताब हूँ तुम्हें अपना बनाने के लिए मैं तैयार हूँ
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